लोकप्रिय इंटरनेट वेब ब्राउजर ‘फायरफॉक्स’ ने पांच वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस दौरान दुनयिा भर में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने इसे एक अरब से अधिक बार डाउनलोड किया।
समाचार एजेंसी डीपीए ने मोजिला फाउंडेशन के अधिकारी क्रिस ब्लीजर्ड के हवाले ले कहा कि सोमवार को फायरफॉक्स ने पांच वर्ष पूरे कर लिए और इस दौरान इसने काफी तेजी से अपने पांव पसारे हैं।
क्रिस ने कहा, “फायरफॉस्क काफी तेजी से काम करता है।”
उल्लेखनीय है कि फायरफॉक्स को माइक्रोसॉफ्ट के इंटरनेट ब्राउजर का मुख्य प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। फिलहाल इंटरनेट बाजार में इसकी हिस्सेदारी 25 फीसदी है।
मोजिला द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि फायरफॉक्स मुक्त बाजार की वकालत करता है और वह इंटनेट को सार्वजनिक संसाधन मानता है।
मोजिला अगले वर्ष फायरफॉक्स का उन्नत संस्करण पेश करने की योजना बना रहा है।
अफगानिस्तान में इसी वर्ष सितम्बर में हुए हवाई हमलों पर आई उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की एक रिपोर्ट में जर्मन सेना के एक कर्नल की निंदा की गई है। इसी अधिकारी ने हमले का आह्वान किया था।
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक नाटो की रिपोर्ट में कहा गया है कि जर्मन सेना के अधिकारी कर्नल जॉर्ज क्लेन ने हमले का आह्वान करके संगठन के आदेशों और नियामकों के विरुद्ध काम किया।
जर्मनी के रक्षा मंत्री कार्ल-थेआडोर जू गुटनबर्ग यह रिपोर्ट शुक्रवार को बर्लिन में संसदीय अधिकारियों को सौंपेंगे।
गौरतलब है कि नाटो सेना की बमबारी में 30 निर्दोष अफगानी नागरिक मारे गए थे।
भारत के प्रोफेसर यशपाल और वियतनाम के त्रिन्ह जुआन थुआन ने संयुक्त रुप से संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) का वार्षिक कलिंगा पुरस्कार जीता है।
संयुक्त राष्ट्र न्यूज सेंटर द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) के महानिदेशक कोईचीरो मत्सूरा ने दोनों विजेताओं को हंगरी के बुडापेस्ट में यह पुरस्कार प्रदान किया।
यूनेस्को द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि विज्ञान की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए वार्षिक �कालिंगा� पुरस्कार भारत के यशपाल और वियतनाम के त्रिन्ह जुआन थुआन को संयुक्त रूप से दिया गया।
संयुक्त विजेता त्रिन्ह दुनिया के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री हैं जिन्होंने वर्ष 2004 में ब्रह्मांड में आकाश गंगा की खोज की थी।
प्रख्यात वैज्ञानिक अनिल काकोडकर परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) के अध्यक्ष पद से 30 नवंबर को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। काकोडकर ने पिछले वर्ष भारत व अमेरिका के बीच असैन्य परमाणु समझौता कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
काकोडकर वैज्ञानिकों के उस दल के सदस्य रहे हैं, जिसने सफलतापूर्वक पोखरण-प्रथम (1974) और पोखरण-द्वितीय (1998) परमाणु परीक्षण संपन्न कराए थे। काकोडकर परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के सचिव भी हैं।
काकोडकर के सेवानिवृत्त होने में मात्र एक महीना शेष रह गया है, लेकिन केंद्र सरकार अभी तक उनका उत्तराधिकारी तय नहीं कर पाई है।
इस पद के लिए जिन नामों की चर्चा है, उनमें भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) के निदेशक श्रीकुमार बनर्जी का नाम सबसे आगे है।
आमतौर पर बीएआरसी के निदेशकों को ही एईसी का अध्यक्ष बनाए जाने की परंपरा रही है। काकोडकर भी इसी रास्ते इस पद पर पहुंचे थे।