एक नए अध्ययन के मुताबिक कम कार्बोहाइड्रेट युक्त लेकिन कैलोरी की समान मात्रा वाले भोजन की अपेक्षा कम कैलोरी और कम वसायुक्त भोजन लेना आपके मिजाज के लिए अच्छा है।
अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति जो अपना वजन कम करते हैं वे एक बेहतर मनोदशा के साथ अच्छी मानसिक अवस्था भी पाते हैं।
‘कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन’ (सीएसआईआरओ) के डी. ब्रिंकवर्थ और उनके साथियों ने 50 वर्ष की आयु के अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त 106 व्यक्तियों पर यह अध्ययन किया था।
इनमें से 55 लोगों को एक साल तक कार्बोहाइड्रेट की न्यूनतम मात्रा व उच्च वसा युक्त भोजन लेने के लिए कहा गया और 51 लोगों को उच्च कार्बोहाइड्रेट व कम वसा युक्त भोजन लेने के लिए कहा गया।
पूरे एक साल के दौरान इन लोगों के शारीरिक भार, मनोदशा और स्वास्थ्य के साथ उनकी सोच, सीखने की क्षमता और यादाश्त में हुए परिवर्तनों की जांच की गई।
एक साल के बाद दोनों समूहों में बिना किसी फर्क के भार में 13.7 किलोग्राम की औसत कमी हुई थी। शुरुआत में (पहले आठ सप्ताह के बाद) दोनों समूहों की मनोदशा में सुधार देखा गया था।
यद्यपि कम वसायुक्त भोजन लेने वालों की मनोदशा में ही एक स्थाई सुधार देखा गया। जबकि उच्च वसायुक्त भोजन लेने वालों की मनोदशा फिर से पहले जैसी ही हो गई थी।
असम में अब चिकित्सक टेलीफोन पर मरीजों को सलाह देंगे। राज्य का स्वास्थ्य विभाग आगामी जनवरी से मरीजों के लिए विशेष हेल्पलाइन सेवा की शुरुआत करेगा।
आपातकालीन सेवा के लिए मरीजों को अगले वर्ष से केवल अपने फोन से 104 डॉयल करना होगा, जिसके बाद चिकित्सक उन्हें आवश्यक सलाह देंगे।
असम के स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिश्व शर्मा ने आईएएनएस से कहा, “इस सेवा से मरीजों या उनके परिजनों को सहायता मिलेगी। कई मामलों में मरीज की मौत महज इस वजह से हो जाती है क्योंकि उसे यह पता नहीं होता कि उसे क्या करना है या कहां जाना है। अब ऐसे लोगों को केवल 104 डॉयल करना होगा और संबंधित चिकित्सक उन्हें आवश्यक सलाह देंगे।”
शर्मा ने कहा, “चिकित्सक मरीज को अस्पताल के बारे में सलाह देंगे और साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सक का भी नाम बताएंगे।” राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सितंबर में राज्य सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए 800 चिकित्सकों की बहाली की थी।
बच्चे के जैविक पिता के साथ ज्यादा समय बिताने वाली महिलाओं के शिशु अपेक्षाकृत अधिक स्वस्थ होते हैं। यह बात एक नए अध्ययन में सामने आई है।
‘यूनीवर्सिटी ऑफ अकलैंड’ (यू-ए) द्वारा कराए गए अध्ययन में पहली बार मां बनीं 2,507 महिलाओं से उनके बच्चे के जैविक पिता के साथ उनके रिश्तों के बारे में विस्तार से पूछा गया।
गर्भावस्था के 37 सप्ताह पूरे होने तक अपने बच्चे के जैविक पिता के साथ संबंध रखने वाली महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान होने वाले उच्च रक्तचाप और बच्चे का सामान्य विकास न होने जैसी समस्याएं अपेक्षाकृत कम देखी गईं।
‘रिप्रोडक्टिव इम्युनोलॉजी’ पत्रिका में इस अध्ययन के परिणाम प्रकाशित किए गए हैं।
चंडीगढ़ में एकसरकारी अस्पताल के 28 वर्षीय चिकित्सक में स्वाइन फ्लू के संक्रमण की पुष्टि होने के साथ ही यहां इस बीमारी के मामलों की संख्या 63 हो गई है।
एक स्वास्थ्य अधिकारी ने सोमवार को कहा, “मरीज सेक्टर 32 के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में चिकित्सक हैं। वह अस्पताल परिसर में ही चिकित्सक आवास में रहते हैं। हमने रविवार उनके जांच नमूने इकट्ठे किए थे।”
उन्होंने कहा कि जांच के बाद पता चला है कि उन्हें फ्लू है। अधिकारी ने कहा कि उनके परिवार के चार सदस्यों को भी विशेष निगरानी में रखा गया है।
अब तक यहां पर 63 लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। चण्डीगढ़ के विभिन्न अस्पतालों के 17 चिकित्सकों में एच1एन1 वायरस की पुष्टि हुई है।
चण्डीगढ़ में स्वाइन फ्लू के नोडल अधिकारी एच. सी. गेरा ने बताया, “स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल कर्मचारियों के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। हम जानते हैं कि उनका काम ही इस तरह का है कि उनमें आसानी से इस वायरस का संक्रमण हो सकता है लेकिन हम इसके फैलाव को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।”
चण्डीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) के एक और चिकित्सक के स्वाइन फ्लू से पीड़ित होने की पुष्टि हुई है। यह जानकारी एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बुधवार को दी।
अस्पताल में 61 लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है जिनमें लगभग 25 फीसदी अस्पताल के चिकित्सक और कर्मचारी शामिल हैं।
स्वाइन फ्लू के नोडल अधिकारी एच.सी.गेरा ने बताया,” हमने मंगलवार को पीजीआईएमईआर के चिकित्सक के नमूने जांच के लिए भेजे थे। जांच के दौरान चिकित्सक में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई।”
उन्होंने कहा कि इसके अलावा पीजीआईएमईआर के दो चिकित्सकों सहित छह अन्य लोगों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। हम उनकी जांच रिपोर्ट की प्रतिक्षा कर रहे हैं।
गौरतलब है कि अभी तक चण्डीगढ़ में स्वाइन फ्लू के 450 संदिग्ध मामले सामने आए हैं जिनमें से 61 में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है।